प्रकृष्टो यज्ञो अभूद्यत्र तदेव प्रयागः

Tirthraaj Prayagraj

Tirthraaj Prayagraj

“प्रयागराज में इलाहाबाद कुछ ऐसे घुला मिला है जैसे गंगा यमुना के संगम में सरस्वती, जितना अदृश्य उतना ही दृश्य “

-अजय 

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मैं तीर्थों का राजा प्रयागराज (Prayagraj) हूं. मेरा वर्णन सिर्फ इतिहास (History) में ही नहीं बल्कि वेदों, पुराणों और उपनिषदों में भी बड़ी महत्ता के साथ किया गया है. मैं सिर्फ नगर ही नहीं, बल्कि पूरे भारत (India) के आस्थावान लोगों के आस्था का केन्द्र भी हूं. मेरी गोद में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती खेला करती हैं. इस पावन धरती पर ऋषियों के ऋषि महर्षि भारद्वाज की तपोस्थली और आश्रम स्थित है. यहीं पर भगवान श्रीराम चन्द्र सीता और लक्ष्मण जी ने वन जाते हुए पहला प्रवास किया. मैं राम की चरणों की धूल भी हूं. हां, मैं प्रयागराज हूं.

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